आश्रम में गुरु-शिष्य की प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए, गुरुदेव के मार्गदर्शन में अनेक बच्चे, युवा और बड़े प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं तथा जप, तप, ध्यान और साधना भी करते हैं। आश्रम में निवासित विद्यार्थियों, साधकों तथा आगंतुक भक्तों को निःशुल्क भोजन प्रसाद प्रदान किया जाता है।
गुरु-शिष्य परंपरा
प्राचीन गुरुकुल परंपरा के अनुसार साधकों का पालन-पोषण
साधना एवं तपस्या
जप, तप, ध्यान और साधना में लीन साधकों को पोषण
निःशुल्क भोजन प्रसाद
सभी विद्यार्थियों, साधकों और आगंतुक भक्तों के लिए
अन्न ब्रह्म है, अन्नदान परम पुण्य है। जो अन्न देता है, वह जीवन देता है। आपका सहयोग इस पावन सेवा को निरंतर बनाए रखने में सहायक होगा तथा साधकों को निष्काम भाव से साधना में लीन रहने का अवसर प्रदान करेगा।
विशेष निवेदन: अन्नदान में आपका योगदान न केवल भौतिक पोषण प्रदान करता है, बल्कि साधकों की आध्यात्मिक यात्रा में भी सहायक बनता है। गुरुदेव का आशीर्वाद सदैव आपके साथ रहे।